About Coronavirus in Hindi

कोरोनावायरस क्या है?

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई प्रकार के विषाणुओं (वायरस) का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है। यह RNA वायरस होते हैं। इनके कारण इंसानों में श्वास तंत्र संक्रमण पैदा हो सकता है जिसकी गहनता हल्की (जैसे सर्दी-जुकाम) से लेकर अति गम्भीर (जैसे, मृत्यु) तक हो सकती है। संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने या बोलने के दौरान उसके मुंह से निकली द्रव की सूक्ष्म बूंदे हवा के माध्यम से एक स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं।

इनकी रोकथाम के लिए कोई टीका (वैक्सीन) या विषाणुरोधी (antivirus) अभी उपलब्ध नहीं है विशेष रूप से स्वच्छता और सावधानी बरत कर कोरोनावायरस के संपर्क में आने से बचा जा सकता है। अभी तक रोगलक्षणों (जैसे कि निर्जलीकरण या डीहाइड्रेशन, बुखार , आदि) का उपचार किया जाता है ताकि संक्रमण से लड़ते हुए शरीर की शक्ति बनी रहे।

चीन के वूहान शहर से उत्पन्न होने वाला 2019 नोवेल कोरोनावायरस इसी समूह के वायरसों का एक उदहारण है, जिसका संक्रमण सन् 2019-20 काल में तेज़ी से उभरकर 2019–20 वुहान कोरोना वायरस प्रकोप के रूप में फैलता जा रहा है। हाल ही में W.H.O. ने इसका नाम COVID-19 रखा।

 

कोरोनावायरस, कोरोनाविरिडाई (Coronaviridae) परिवार का एक सदस्य है। कोरोना एक लेटिन शब्द है, जिसका मतलब क्राउन (सिर का ताज) होता है। कोरोनाविरिडाई की सतह पर क्राउन जैसा उभार होता है, इसलिए इस परिवार से वायरसों का नाम कोरोनावायरस पड़ गया।

 

कोरोनावायरस संक्रमण के लिए कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। सामान्य वायरल इन्फेक्शन की तरह यह कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि इसके लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर मरीज को कुछ विशेष दवाएं दे सकते हैं। इलाज के दौरान मरीज को अस्पताल में भर्ती भी किया जा सकता है, ताकि यह संक्रमण अन्य लोगों में फैलने से रोका जाए।

 

कोरोना वायरस के प्रकार – (Types of Coronavirus)

कोरोनावायरस के कितने प्रकार हैं?

मनुष्यों में अभी तक कोरोनावायरस के सात प्रकार पाए गए हैं। इनमें से चार आम प्रकार के होते हैं, जो सर्दी-जुकाम और ऊपरी श्वसन तंत्र में संक्रमण का कारण बनते हैं। जोकि निम्लिखित हैं –

  • 229E (अल्फा कोरोनावायरस)
  • NL63 (अल्फा कोरोनावायरस)
  • OC43 (बीटा कोरोनावायरस)
  • HKU1 (बीटा कोरोनावायरस)

इनके बाद कोरोनावायरस के तीन प्रकार आते हैं, जो मनुष्यों में गंभीर व जानलेवा संक्रमण पैदा कर देते हैं। ये तीन वायरस निम्न हैं –

  • एसआरएएस-सीओवी (SARS-CoV)
    एसएआरए-सीओवी कोरोनावायरस का एक ऐसा प्रकार है, जो “सिवियर एक्युट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम” नामक वायरल संक्रमण का कारण बनता है। यह सबसे पहले वर्ष 2003 में एशिया में पाया गया था। डब्लूएचओ के अनुसार 2003 में एसएआरएस संक्रमण चीन के दक्षिण भागों से शुरु हुआ था और धीरे-धीरे 37 देशों तक फैल गया था। इस दौरान 8098 लोग बीमार पड़ गए थे और 774 लोगों की मृत्यु हो गई थी।
  • एमईआरएस-सीओवी (MERS-CoV)
    कोरोनावायरस का यह प्रकार “मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम” (MERS) का कारण बनता है, यह भी एक प्रकार का वायरल संक्रमण है, जिसे “कैमल फ्लू” के नाम से भी जाना जाता है।ऐसा माना जाता है कि एमईआरएस-सीओवी मुख्य रूप से अरबी प्रायद्वीपों के जानवरों से आया है। इसके कुछ निशान ऊंटों में भी पाए गए हैं और इसलिए यह भी माना जा रहा है कि एमईआरएस-सीओवी ऊंटों से मनुष्यों में फैला है।एक अध्ययन के अनुसार एमईआरएस-सीओवी से संक्रमित हर 10 में से 3 लोगों की मृत्यु हो जाती है।
  • सीओवीआईडी-19 (COVID-19)
    सीओवीआईडी-19 कोरोनावायरस इसका सबसे नया प्रकार है। सीओवीआईडी-19 की पहचान सबसे पहले 31 दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में की गई थी।रिपोर्ट के अनुसार 31 दिसंबर 2019 से 20 जनवरी 2020 तक सीओवीआईडी-19 के लगभग 278 मामले सामने आए हैं। डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार चीन के अलावा सीओवीआईडी-19 से होने वाली मृत्यु के साउथ कोरिया, ईटली और ईरान समेत कई देशों में मामले सामने आ चुके हैं।

कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण – Coronavirus Infection symptoms

कोरोनावायरस संक्रमण से क्या लक्षण होते हैं?

कोरोनावायरस संक्रमण से विकसित होने वाले लक्षण मुख्य रूप से वायरस के प्रकार पर निर्भर करते हैं। 229E, NL63, OC43 और HKU1 से होने वाले संक्रमण में अक्सर कोई गंभीर लक्षण विकसित नहीं होता है। ये वायरस मुख्य रूप से निचले श्वसन तंत्र में संक्रमण, छाती में संक्रमणब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसे लक्षण पैदा करते हैं।

कोरोनावायरस से होने वाले संक्रमण में निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं :

  • गले में दर्द होना
  • छींक खाना
  • नाक बहना
  • लगातार सिरदर्द रहना
  • सूखी खांसी होना
  • हल्का बुखार होना
  • कमजोरी महसूस होना
  • बदन दर्द होना

इसके अलावा कोरोनावायरस से कुछ गंभीर लक्षण भी हो सकते हैं, जो पूरी तरह से वायरस के प्रकार पर निर्भर करते हैं :

एसएआरएस-सीओवी (SARS-CoV) से होने वाले लक्षण –

  • तेज बुखार होना
  • सिदर्द
  • गंभीर बदन दर्द
  • हर समय कमजोरी महसूस होना
  • सूखी खांसी होना
  • दस्त लगना (कुछ मरीजों में)

एमईआरएस-सीओवी (MERS-CoV) से होने वाले लक्षण –

  • खांसी
  • बुखार
  • सांस लेने में तकलीफ होना

सीओवीआईडी (COVID-19) से होने वाले लक्षण

  • ठंड लगना व बुखार होना
  • मांसपेशियों में दर्द होना
  • नाक बहना
  • खांसी होना
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • निमोनिया

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण महसूस हो रहे हों और वे दो से तीन दिनों तक लगातार बने रहें, तो डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए। इसके अलावा यदि आपको ऊपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो भी आप डॉक्टर से जांच करवाकर पुष्टि कर सकते हैं।

यदि आप किसी ऐसे क्षेत्र में घूमने गए हैं जहां पर वर्तमान में या पहले कभी कोरोनावायरस फैल चुका है। ऐसे में चाहे आपको कोई लक्षण भी महसूस नहीं हो रहा हो फिर भी डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए।

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण – Coronavirus Infection Causes

कोरोनावायरस संक्रमण कैसे फैलता है?

कोरोनावायरस से होने वाला संक्रमण सर्दी-जुकाम की तरह तेजी से फैलता है। यह वायरस वातावरण में मौजूद पानी की अति सूक्ष्म बूंदों के जरिए भी फैल सकता है। यदि कोरोनावायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो उसके मुंह व नाक से द्रव की अतिसूक्ष्म बूंदे हवा में मिल जाती हैं, इन बूंदों में कोरोनावायरस भी होता है।

जब इस संक्रमित हवा में कोई स्वस्थ व्यक्ति सांस लेता है, तो हवा के माध्यम से कोरोनावायरस भी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाता है और संक्रमण पैदा कर देता है।

यह वायरस सिर्फ श्वसन तंत्र में मौजूद बाल जैसे दिखने वाले ऊतकों में ही बढ़ते हैं। कोरोनावायरस के कारण कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती है और उनमें सूजन आने लगती है, इस स्थिति में छींके आना, श्वसनमार्ग में रुकावट और म्यूकोसा का तापमान बढ़ना आदि समस्याएं होने लगती हैं।

मनुष्यों को संक्रमित करने वाले वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति या वस्तु को छूने से एक स्वस्थ व्यक्ति में फैलते हैं। लोग मुख्य रूप से निम्न स्थितियों में कोरोनावायरस के संपर्क में आते हैं –

  • किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा खांसने या छींकने पर संक्रमित हुई हवा में सांस लेना
  • संक्रमित व्यक्ति के साथ एक कमरे में रहना या उसके पास खड़े होकर उससे बात करना
  • संक्रमित व्यक्ति को छूना या उससे हाथ मिलाना
  • किसी ऐसी वस्तु या सतह को छूना जिसपर कोरोनावायरस हो, उदाहरण के लिए संक्रमित व्यक्ति द्वारा दूषित की गई वस्तु
  • कुछ दुर्लभ मामलों में कोरोनावायरस मल से दूषित वस्तुओं के माध्यम से भी फैल सकता है।

कोरोनावायरस संक्रमण होने का खतरा कब बढ़ता है?

कुछ स्थितियां हैं, जिनमें कोरोनावायरस संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है –

  • ऐसे क्षेत्रों में रहना जहां इस वायरस का अधिक प्रकोप हो
  • अस्पताल या लेबोरेटरी में काम करना
  • घर में कोई व्यक्ति पहले से ही कोरोनावायरस से संक्रमित होना |

कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव – Prevention of Coronavirus Infection

कोरोनावायरस के बचाव कैसे किया जा सकता है?

कोरोनावायरस की रोकथाम करने के लिए अभी तक कोई दवा या टीकाकरण उपलब्ध नहीं हो पाया है। कोरोनावायरस के संपर्क में आने से खुद को बचाना ही इस संक्रमण की रोकथाम करने का सबसे अच्छा तरीका है। हालांकि, कोरोनावायरस काफी तेजी से फैलता है, इसलिए इसके संपर्क में आने से बचने के लिए बड़ी सावधानीपूर्वक निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  • यदि कोई व्यक्ति कोरोनावायरस से संक्रमित है, तो उसके ज़्यादा नज़दीक ना जाएं।
  • यदि आपने किसी संक्रमित व्यक्ति को या उसके कपड़ों को छू लिया है, तो अपने हाथों को कम से कम 20 सेकेंड तक रगड़ कर धोएं।
  • यदि आपने किसी ऐसी चीज को स्पर्श किया है जो स्वच्छ नहीं है, तो हाथों को धोए बिना अपने मुंह, आंख या नाक को न छुएं।
  • ऐसी जगहों पर न जाएं जहां कोरोनावायरस का प्रकोप अधिक है।

कोरोना वायरस संक्रमण का परीक्षण – Diagnosis of Coronavirus Infection

कोरोनावायरस संक्रमण की जांच कैसे की जाती है?

यदि डॉक्टर को लगता है कि आपको कोरोनावायरस है, तो इसकी पुष्टि करने के लिए वे कुछ टेस्ट कर सकते हैं। कोरोनावायरस संक्रमण की जांच करने के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं –

  • मोलिक्यूलर टेस्ट –
    इसमें मुख्य रूप से रियल-टाइम रिवर्स-ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज चेन रिएक्शन (rRT-PCR) टेस्ट किया जाता है। इस वायरस की मदद से शरीर में वायरल आरएनए की जांच की जाती है।
  • सेरोलॉजी टेस्ट –
    इसमें मुख्य रूप से एलिसा टेस्ट और एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसोरबेंट एस्से शामिल हैं। इन टेस्टों की मदद से शरीर में कोरोनावायरस संक्रमण के विरोध में शरीर द्वारा बनाई गई एंटीबॉडीज की पहचान की जाती है।

इसके अलावा परीक्षण के दौरान मरीज से उसके द्वारा महसूस किए जा रहे लक्षणों के बारे में पूछा जा सकता है। साथ ही साथ मरीज से कुछ सवाल भी पूछे जा सकते हैं, जिनमें उनके द्वारा हाल ही में की गई कोई यात्रा या फिर किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से संबंधित बातें पूछी जाती हैं।

कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज – Coronavirus Infection Treatment

कोरोनावायरस संक्रमण का इलाज कैसे किया जाता है?

कोरोनावायरस से होने वाले संक्रमण के लिए अभी तक कोई उपचार उपलब्ध नहीं हो पाया है। कोरोनावायरस संक्रमण से ग्रस्त ज्यादातर लोग कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि जिन लोगों में इस संक्रमण के कारण गंभीर लक्षण विकसित हो गए हैं, डॉक्टर उन्हें कुछ दवाएं भी दे सकते हैं। ये दवाएं मुख्य रूप से मरीज के लक्षणों व स्थिति की गंभीरता को कम करने में मदद करती हैं। मरीज के लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर निम्न उपचार करते हैं –

  • बुखार के लिए एंटीपायरेटिक दवाएं जैसे पैरासिटामोल
  • शरीर में पानी की कमी को दूर करने के लिए मरीज को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना
  • गले में दर्द के लिए कुछ विशेष प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं देना
  • घर पर रहने और आराम करने की सलाह देना

डॉक्टर मरीज व उसके सामान को बाकी परिवारजनों से अलग करवा सकते हैं, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जाए। लक्षणों को नियंत्रित करने और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कुछ मामलों में डॉक्टर मरीज को अस्पताल में भी भर्ती कर सकते हैं।